आपकी मानसिक सेहत को और बेहतर बनाने में आपकी सारथी

हर साल ८ लाख से अधिक लोग आत्महत्या के द्वारा अपनी ज़िन्दगी का अंत कर देते है क्युकी जीना उनके लिए भारी सा हो जाता है। दरअसल बात यह है की हम सुनते कम है और बोलते ज़्यादा है, ध्यान कम देते है और आंकते ज्यादा है। सबसे ज़्यादा खतरनाक होता है सपनो का मर जाना और फिर खुद को जीवित रखने की मशक्कत एक मानसिक पीड़ा में बदल जाती है।

मेरे जैसे कई लोग इसी वजह से मानसिक स्वास्थ्य के हित में अपनी आवाज़ उठाते है और जागरूकता फैलाने की कोशिशों में जुटे है। मेरा यह हिंदी ब्लॉग मेरी तीसरी कोशिश है , यहाँ अपने विचार और सीख आप सब के साथ बाटते हुए मैं आपकी साधारण से ज़िन्दगी का हिस्सा बनते हुए थोड़े असाधारण कर्म करने की कोशिश कर रही हु। मैं पहले ही मेरे दो अंग्रेजी ब्लोग्स पर मानसिक स्वास्थ्य पर ६०० से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी हु।

जुड़े रहिये, हर हफ्ते एक नहीं सोच और आवाज़ लेकर आपके समक्ष आती रहूंगी।

प्रियंका
Sanity Daily

साप्ताहिक प्रकाशन

Priyanka Nair

बस इतनी सी बात पे आत्महत्या कर ली , एक बार बोलता तो सही: आत्महत्या क्यों करते हैं लोग

क्या आप जानते है हर साल ८ लाख से भी अधिक लोग आत्महत्या करके अपनी ज़िंदगी का अंत कर देते है, एक प्रकार से वो ख़ुद को सारे दुःख दर्द से आज़ाद कर देते है पर उनकी मौत भी उन्हें शांति नहीं देती क्यूँकि उनके मरने के तरीक़े पे लोग उँगलियाँ उठाते है। मैं किसी …

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